हमारी भारतीय संस्कृति में प्राचीन समय से हमारे ऋषि मनीषियों ने अहार की महत्ता को बहुत करके माना है। आहार कैसा हो ? किस समय कैसा आहार हो ? कितना हो ? यह सारी जानकारी हमारे प्राचीन ग्रंथों में उल्लेखित हैं।हमारे देश में छह ऋतुओं में पूरे वर्ष को विभाजित किया गया है । अलग अलग ऋतुओं के अनुसार भोजन की अलग अलग व्यवस्था का उल्लेख हमारे प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथो में किया गया है । आयुर्वेद के मत से ऋतु के अनुसार भोजन कैसा हो आइये हम इस पर चर्चा करते हैं। जिससे हमारा शरीर प्राकृतिक रूप से स्वस्थ्य व् सबल रहे ।

प्राचीन मनीषियों ने जिस भाति पूरे वर्ष को छह ऋतुओं में बांटा है उसी भाति हर ऋतु में शाक, अनाज एवं फल भी भिन्न भिन्न पैदा होते हैं। ऋतुओं के अनुसार ही हमारी भोजन सामग्री के चुनाव में आवश्यक फेरबदल करना पड़ता है। स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक है कि हम भिन्न-भिन्न ऋतुओं में किए जाने वाले आहार और विहार के बारे में विशेष सावधानी बरतें । ऋतुओं के अनुसार ही अपना भोजन ले ।

प्रत्येक ऋतु में जो महीने होते हैं यानि हिंदी एवं अंग्रेजी महीना को हम निम्नलिखित रुप में समझ सकते है।

क्र सं ऋतु हिंदी महीना अंग्रेजी महीना
1 शिशिर ऋतु माघ – फाल्गुन 14 जनवरी से 13 मार्च
2 बसंत ऋतु चैत्र – वैशाख 14 मार्च से 13 मई
3 ग्रीष्म ऋतु ज्येष्ठ – आषाढ़ 14 मई से 13 जुलाई
4 वर्षा ऋतु श्रावण – भाद्रपद 14 जुलाई से 14 सितंबर
5 शरद ऋतु आश्विन – कार्तिक 14 सितंबर से 13 नवंबर
6 हेमंत ऋतु अगहन – पौष 14 नवंबर से 13 जनवरी
हिंदी ऋतु तालिका

इन छह ऋतुओं में से प्रथम तीन ऋतु – शिशिर, बसंत एवं ग्रीष्म में सूर्य उत्तरायण में रहता है। और शेष तीन ऋतुओं में वर्षा, शरद व् हेमंत में दक्षिण दिशा में गमन करता है जिसे दक्षिणायन कहते हैं।

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ऋतुओं के अनुसार भोजन क्यों ? Why food according to the seasons?

जब सूर्य उत्तरायण में होता है। उस समय सभी प्राणियों के शरीर में शक्ति कम हो जाती है अर्थात शिशिर, बसंत एवं ग्रीष्म में क्रमशः हमारे शरीर का बल घटता जाता है। इसके विपरीत वर्षा, शरद व् हेमंत ऋतु में जब सूर्य देव दक्षिण भाग में रहते हैं। तो सभी प्राणियों को बल की प्राप्ति होती है। इस प्रकार सूर्य के आधार पर, ऋतु के अनुसार, हमारे शरीर बल के अनुसार भोजन का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

किस ऋतु में कैसा भोजन करें ? what season to eat ?

शिशिर ऋतु में कैसा भोजन करें ? How to eat food in winter?

किस ऋतु में कैसा भोजन करें ? इसके लिए हम क्रमश: सबसे पहले शिशिर ऋतु के बारे में चर्चा की शुरुआत करते है इस ऋतु में माघ एवं फाल्गुन के महीने कहे गए हैं इन महीनों में मेघ बरसते हैं तथा हवा एवं वर्षा के कारण विशेष शीत पड़ने लगती है इस ऋतु में दूध से बनी चीजें दही मलाई आदि तथा गुड़, तेल और नए चावलों का भात खाना चाहिए गुनगुने जल का प्रयोग इस ऋतु में विशेष लाभदायक होता है इस ऋतु में कड़ी जैसे करेले, तिल, मिर्च कषैले रसवाली भोजन सामग्री का उपयोग नहीं करना चाहिए

बसंत ऋतु में कैसा भोजन करें ? How to eat food in spring ?

बसंत ऋतु में कैसा भोजन करें ? ऋतु का राजा कहे जाने वाली इस ऋतु में सभी की पाचन शक्ति कुछ कम हो जाती है इसलिए इस ऋतु में ऐसा भोजन नहीं करना चाहिए जो गुरु अर्थात पचने में भारी हो इन दिनों खट्टे मीठे और अधिक मिर्च मसाले से बने हुए भोजन से परहेज करना चाहिए और दिन में सोना नहीं चाहिए

ग्रीष्म ऋतु में कैसा भोजन करें ? How to eat food in summer?

ग्रीष्म ऋतु में कैसा भोजन करें ? जेठ आषाढ़ की गर्मी से परेशान हुए मनुष्य को इस ऋतु में मधुर रस वाले, शीतल, ठंडे आहार एवं पीने वाली चीजों का अधिक प्रयोग करना चाहिए दूध, चावल, सत्तू का ठंडा पेय लाभदाई होता है किसी प्रकार का वासी तथा मसालेदार गरिष्ठ भोजन नुकसान पहुंचाता है

वर्षा ऋतु में कैसा भोजन करें ? How to eat food in rainy season?

वर्षा ऋतु में कैसा भोजन करें ? इस ऋतु में मनुष्य का शरीर अन्य ऋतुओं की अपेक्षा अत्यंत दुर्बल रहता है दुर्बल शरीर में पाचन शक्ति कमजोर होती है इसलिए वर्षा ऋतु में भोजन सामग्री की स्वच्छता तथा मात्रा का विशेष ध्यान रखना चाहिए वर्षा ऋतु में भोजन सामग्री में शहद का प्रयोग उत्तम होता है इस समय पुराने गेहूं और चावल का प्रयोग उचित रहता है जल उबाल कर ठंडा कर लें उसमें थोड़ा शहद मिलाकर प्रयोग करने से अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है वर्षा काल में दिन में नहीं सोना चाहिए और रात्रि में खुले आकाश में नहीं बैठना चाहिए अधिक व्यायाम नहीं करना और धूप में भी नहीं बैठना चाहिए

शरद ऋतु में कैसा भोजन करें ? How to eat food in autumn?

शरद ऋतु में कैसा भोजन करें ? इस ऋतु में धूप का सेवन ना करें वसा ,तेल और जलीय प्राणियों का मांस जैसे मछली का प्रयोग नहीं करना चाहिए दही का प्रयोग भी हानिकारक माना जाता है दिन में सोना नहीं चाहिए तथा पूर्वी हवा का भी सेवन नहीं करना चाहिए अधिक भूख लगने पर मधुर एवं हल्का सुपाच्य भोजन जो शीतल एवं तिक्त रसवाला जैसे करेला को कम मात्रा में प्रयोग करना चाहिए

हेमंत ऋतु में कैसा भोजन करें ? How to eat food in Hemant season?

हेमंत ऋतु में कैसा भोजन करें ? इस ऋतु में पाचन शक्ति बलवान होती है जो गुरु यानी गरिष्ठ भोजन को पचाने में समर्थ होती है इस काल में स्निग्ध पदार्थ खट्टे रस का प्रयोग विभिन्न प्रकार की दूध से बनी चीजें, मीठी व सा तेल से बनी भोजन सामग्री नए चावलों का भात तथा गर्म जल का प्रयोग लाभकारी होता है

मन लगाकर भोजन करना चाहिए खाना खाते हुए किसी प्रकार की बुरी भावना क्रोध लालच आदि को मन में नहीं आने देना चाहिए अपनी आत्मा को भली प्रकार समझकर भोजन करना चाहिए यह आहार मेरे लिए लाभकारी है यह भोजन मेरे लिए हानिकारक है इस प्रकार से अपनी अंतरात्मा का निर्णय होते अपने आप हमें ज्ञात हो जाता है अत्यंत अभाव के आधार पर ई भोजन ग्रहण करना चाहिए प्राचीन शास्त्र के अनुसार अपने विश्वासपात्र एवं प्रिय व्यक्ति के हाथों से तैयार किया गया भोजन ही प्यार करना चाहिए हम जैसा अन्न खाते हैं हमारा मन भी उसी प्रकार के विचारों वाला हो जाता है इस प्रकार उचित भोजन के प्रयोग से ना केवल हम शारीरिक तौर पर स्वस्थ एवं बलवान बन सकते हैं अपितु मानसिक स्तर पर भी हमारे विचारों में शुद्धता एवं स्वस्थ परंपरा का सूर्य उदय हो सकता है

अतः हमको अपने अन्तः भाव से ही भोजन करना चाहिए । इसके साथ ही विश्वास पात्र व् प्रिय व्यक्ति के हाथो तैयार भोजन ही ग्रहण करना चाहिए । ये प्राचीन भारतीय आयुर्वेद विज्ञानं का भोजन के ग्रहण करने के बारे में बहुत ही उत्तम ज्ञान का सारांश देने का मेरा एक प्रयास है। मेरा विश्वास है की ये आपके लिए अवश्य लाभकारी होगा।

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