हमारे यहां एक कहावत प्रचलित “कम खाओ और गम खाओ” यानी कम खाना ही हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। परन्तु आजकल अधिकतर व्यक्ति अपनी पाचन क्षमता से अधिक खाते हैं और यह अधिक खाने की आदत उनके स्वास्थ्य को बर्बाद करने के कारणों में से एक मुख्य है और अपने शरीर को कमजोर होने से बचाने के लिए दिन भर खाते रहने की गलत धारणा ही, आज होने वाली गंभीर बीमारियों जैसे मोटापा, डाइबिटीज आदि को बढा रही है ।

ईरान के बादशाह बहमन ने अपने राजचिकित्सक लेत्सुम से पूछा – स्वस्थ मनुष्य को दिन रात में कितना खाना चाहिए। राजचिकित्सक लेत्सुम ने उत्तर दिया – 39 तोला । इस पर बादशाह ने पूछा – भला इतने कम भोजन से काम कैसे चलेगा। चिकित्सक ने उत्तर दिया – स्वस्थ रहने के लिए तो इतना ही पर्याप्त है परन्तु वजन ढोने के लिए कितना ही खाया जा सकता है।

गांधी जी ने भी अपने 125 वर्ष जीने की घोषणा की थी यदि वे गोली से ना मारे गए होते तो संभवत है ।इतनी लंबी आयु अपने आहार संयम से जी पातेl

विश्व विख्यात डॉक्टर मैकफेडेम ने कहा है – भोजन के अभाव में संसार में जितने लोग अकाल पीड़ित होकर मरते हैं उससे कहीं अधिक अनावश्यक भोजन करने के कारण रोग ग्रस्त होकर मरते हैं।

यूनान की एक कहावत है तलवार उतने लोगों को नहीं मारती, जितने अधिक खाकर मरते हैं।

सुलेमान कहते हैं – जोअधिक खाएगा वह अपना दाना पानी जल्दी खत्म करके मौत के मुंह में समय से पहले ही चला जाएगा।

आस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध डॉक्टर हर्न कहते थे – लोग जितना खाते हैं उसका एक तिहाई भी पचा नहीं पाते।

स्वास्थ्य विज्ञानी हेरी बेंजामिन ने कहा है – बेवकूफियां में, परले सिरे की बेवकूफी है, अधिक भोजन करना।

डॉक्टर लोएंड ने आयु को घटाने वाले जो 10 कारण बताए हैं, उनमें प्रथम, अधिक भोजन करने की बुरी आदत को माना है।

संसार के महापुरुषों में से लगभग प्रत्येक की यह विशेषता रही है कि उन्होंने भूख से कम मात्रा में भोजन लेने का नियम रखा है और अपने स्वास्थ्य को अच्छा रखा है।

विश्व के सर्वाधिक लम्बी आयु पाने वाले व्यक्तियों में से – 1.- अमेरिका के केमेलेटोजा 187 वर्ष तक जीवित रहे । 2.- हंगरी के पीटर्स झोंटरन जो 185 वर्ष तक जीवित रहे । 3.- यार्क शायर की हेनरी जैनकिस जो 161 वर्ष तक जीवित रहे । 4.- इटली के जोसेफ रिंगटन जो 160 वर्ष तक जीवित रहे। जब वह मरे तब उनका बड़ा लड़का 108 वर्ष का था और सबसे छोटा 8 वर्ष का। 5.- इंग्लैंड के थामसपार जो 152 वर्ष तक जीवित रहे । 6.- लेडी कैथराइन काउंटेस डेसमंड जो 146 वर्ष तक जीवित रहे। और जिनके मुंह में तीन बार दांत निकले 7.- जॉनाथन हारपोट जो 139 वर्ष तक जीवित रहे । उनके 7 पुत्र, 26 पौत्र और 140 प्रपौत्र उनके सामने पैदा हुए थे। इन सभी ने अपनी लंबी आयु के कारणों में से एक कारण हमेशा भूख से कम भोजन करना और पेट को खाली रखने का स्वभाव बताया।

बंगाल के प्रसिद्ध डॉक्टर विधान चंद्र राय कहते थे कि 80% मनुष्य आवश्यकता से अधिक मात्रा में भोजन करने के कारण बीमार पड़ते हैं।

सर विलियम टेंपल ने अपने “लोंगलाइफ” पुस्तक में – मितआहार पर बहुत जोर दिया है और उन्होंने लिखा है कि यदि अधिक दिन जीना हो तो अपनी खुराक को घटाकर उतनी ही रखो जितने से पेट को बराबर हल्कापन अनुभव होता रहे।

हमारे देश में व्रत उपवास की परंपरा का प्रचलन भी स्वाथ्य व् लम्बे जीवन की प्राप्ति के लिए मनीषियों ने किया है कि लोग कम खाने का अभ्यास करें और दीर्घ जीवी बने। समय-समय पर पेट को अवकाश देने व् दैनिक जीवन में भोजन का उचित मात्रा में औषधि रूप में सेवन करने की भारतीय परंपरा शुरू से रही है।

भगवन दत्तात्रेय ने 24 गुरु बनाए। उनमें से एक मछली भी थी जिसने अपनी जीभ की लोलुपता के वस में होकर कांटे समेत आटे को निगल लिया था और अपने प्राण गवा दिए थे । मछली की इस घटना से दत्तात्रेय ने निष्कर्ष निकाला कि जिसकी स्वाद इंद्रियों पर काबू नहीं है वह बेमौत मरता है इस बहुमूल्य शिक्षा को देने के कारण उन्होंने मछली को भी एक गुरु माना था ।

अश्विनी कुमारों ने बाणभट्ट जी से पूछा – निरोग कौन ? उसके उत्तर में बाणभट्ट जी ने कहा – “हित भुक, मित भुक” अर्थात जो उपयोगी पदार्थ ही ग्रहण करता है और भूख से कम खाता है।

आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ बाणभट्ट में भोजन की मात्रा कम रखने का निर्देश दिया गया है

अन्नेन कुक्षेदर्वावंशी पाने नैकं प्रपूरयेत, आश्रयम पचनादीनां चतुर्थ मवशेष येत ।

अर्थात – पेट का आधा भाग आहार से भरे, चौथाई को पानी के लिए और चौथाई को हवा के लिए खाली रहने दें।

महर्षि चरक ने भी अल्प मात्रा में भोजन करने के लिए कहा है।

स्वामी रामतीर्थ ने भी कहा है – “खूब ठूंस – ठूंस कर खाना ही सबसे बड़ा पाप है।

मनुस्मृति में भी लिखा है –

अनारोग मनायुष्य म स्वर्ग चाति भोजनम, आयुष्यं लोक विदिष्टं तस्मात्तत परिवर्जयेत ।

अर्थात अति भोजन करना स्वास्थ्य को नष्ट करने वाला, आयु को घटाने वाला, नरक में ले जाने वाला, पाप रूप और लोक निन्दित है इसलिए इस कुटैब को अवश्य छोड़ देना चाहिए।

उपरोक्त बातो को ध्यान में रखकर चला जाए तो हम वर्तमान भोजन मात्रा में कम से कम एक तिहाई कमी अवश्य ही करने को बाध्य होंगे। इससे स्वास्थ्य और धन की बर्बादी से सहज ही बचा जा सकेगा। स्वस्थ्य व् लम्बी आयु पाने में भोजन की भूमिका को हमें अवश्य महत्व देना होगा ।

उपरोक्त आर्टिकल कई स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर केवल शिक्षा के लिए है, भोजन के बारे में अपने हेल्थ एक्सपर्ट की राय ही उपयोग में ले ।आपके लिए ये Article ” कम भोजन करना है लम्बी उम्र का राज Eating less food is the secret of long life”  कितना उपयोगी लगा कृपया कमेंट करके जरूर बताएं।

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